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नवरात्रि की अष्टमी पर नलखेड़ा में आस्था का सैलाब, माँ बगलामुखी धाम में सुबह से उमड़ती रही भीड़..

🙏 नवरात्रि की अष्टमी पर नलखेड़ा में आस्था का सैलाब, माँ बगलामुखी धाम में सुबह से उमड़ती रही भीड़..

आकाश शर्मा ।माचलपुर/नलखेड़ा नवरात्रि की अष्टमी पर माँ बगलामुखी सिद्धपीठ में आस्था चरम पर दिखाई दी। लखुंदर नदी किनारे स्थित प्राचीन मंदिर परिसर में मंगलवार को हजारों भक्तों ने पहुँचकर निष्ठा और श्रद्धा की हाजिरी लगाई। ग्रामीण अंचल से लेकर शहरों तक से श्रद्धालु सुबह से ही लाइन में लगना शुरू हो गए थे।

मंदिर को पांडवकालीन माना जाता है और तांत्रिक साधना के लिए देश का प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ साधना और हवन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मंदिर में माता बगलामुखी के साथ लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएँ स्थापित हैं और भक्त इन्हें त्रिशक्ति के रूप में पूजते हैं।

अष्टमी के दिन भक्त विभिन्न स्वरूपों में दर्शन को पहुँचे—कहीं डीजे और ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकले, तो कई श्रद्धालु बिना चप्पल-जूतों के नंगे पैर दूर-दूर से पैदल चलकर माता के दरबार पहुँचे। नंगे पाँव आने वाले भक्तों ने बताया कि वे नौ दिन तक माता के नाम से नंगे पाँव व्रत रखते हैं और यात्रा के दौरान उन्हें कोई कष्ट तक महसूस नहीं होता। एक श्रद्धालु ने कहा, “माता हमारी थकान और पीड़ा को महसूस तक नहीं होने देती।”

मंदिर परिसर में हवन और यज्ञ का विशेष महत्व माना जाता है। अष्टमी पर दूर-दराज से आए भक्तों ने यज्ञ करवाकर मनोकामनाएँ व्यक्त कीं। वहीं भंडारे में व्रतधारियों के लिए फरियाल सामग्री जैसे खिचड़ी आदि की व्यवस्था रही, जबकि आम श्रद्धालु दाल-बाटी, पुड़ी-सब्जी, हलवा और अन्य व्यंजनों का प्रसाद ग्रहण करते रहे।

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों के पहुँचने से शहर में धार्मिक उत्साह चरम पर रहा। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएँ कीं। भक्तों का कहना है कि माँ बगलामुखी में आस्था ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है और हर वर्ष वे इसी विश्वास के साथ दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं।

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