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रामायण की जीवंत झांकियों ने मोहा मन, प्रभु श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान हुआ नगर, बुराई के अंत और सत्य की जीत का दिया संदेश।

❤️अधर्म पर धर्म की विजय का गवाह बना माचलपुर, गगनभेदी जयकारों के बीच हुआ रावण दहन। रामायण की जीवंत झांकियों ने मोहा मन, प्रभु श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान हुआ नगर; बुराई के अंत और सत्य की जीत का दिया संदेश।

 

 

माचलपुर (आकाश शर्मा संवाददाता)। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व नगर में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर धार्मिक झांकियों ने माहौल को राममय बना दिया। प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और संकटमोचन हनुमान के स्वरूप में सजे कलाकारों की आकर्षक वेशभूषा और जीवंत अभिनय ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वहीं, रावण दहन के साथ ही पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। विजयादशमी के इस पावन अवसर पर रामायण की कथा मानो सजीव होकर नगरवासियों के सामने उतर आई। धार्मिक झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का संदेश दिया गया। कलाकारों के सजीव प्रस्तुतिकरण ने श्रद्धालुओं को रामायण के उन प्रसंगों की याद दिलाई, जिनमें अन्याय और अहंकार के विरुद्ध धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीराम ने संघर्ष किया था। पर्व के उल्लास के बीच श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया और वातावरण भक्तिमय बना रहा।

अहंकार और अधर्म के अंत का प्रतीक है रावण दहन।
विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। रामायण की मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। रावण अत्यंत विद्वान, शक्तिशाली और शिवभक्त होने के बावजूद अपने अहंकार तथा अनुचित आचरण के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। उसकी पराजय यह संदेश देती है कि ज्ञान, शक्ति और वैभव भी व्यक्ति को पतन से नहीं बचा सकते, यदि वह धर्म और मर्यादा का मार्ग छोड़ दे। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। यह केवल एक पुतले का दहन नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, अन्याय और बुराइयों को समाप्त करने का प्रतीकात्मक संदेश भी है। पर्व लोगों को प्रेरित करता है कि वे भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाते हुए सत्य, सदाचार और मर्यादा के मार्ग पर चलें।
 जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा नगर।
रावण दहन के अवसर पर उपस्थित लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक रावण दहन हुआ, ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। बड़ी संख्या में नगरवासियों ने आयोजन में सहभागिता कर पर्व की खुशियां साझा कीं। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सौहार्द के संगम ने विजयादशमी के उत्सव को यादगार बना दिया।
पुलिस एवं प्रशासन की टीम सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद रही। पूरे आयोजन के दौरान शांति एवं सौहार्द का माहौल बना रहा और विजयादशमी का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
रावण दहन के बाद मंदिरों में दर्शन, गले मिलकर दी विजयादशमी की शुभकामनाएं।
माचलपुर में विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन करने की परंपरा वर्षों से निरंतर चली आ रही है। श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इसके बाद नगर में एक-दूसरे से गले मिलकर और हाथ मिलाकर विजयादशमी की शुभकामनाएं देने का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह परंपरा आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और सामाजिक एकता की सुंदर मिसाल पेश करती है। पर्व की खुशियां केवल सार्वजनिक आयोजन तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि घर-घर तक पहुंचती हैं। लोग अपने परिचितों, रिश्तेदारों और समाज के वरिष्ठजनों के घर पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते हैं, वहीं बड़े-बुजुर्ग छोटे बच्चों को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद देते हैं और उपहार भेंट कर उनकी खुशियों को दोगुना करते हैं। इस दौरान बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। बुजुर्गों का सम्मान, छोटों के प्रति स्नेह और एक-दूसरे के प्रति शुभकामनाओं का यह सिलसिला नगर की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। विजयादशमी का यह पर्व माचलपुर में केवल रावण दहन तक सीमित नहीं, बल्कि आपसी संबंधों को मजबूत करने, पुराने गिले-शिकवे भुलाने और प्रेम-सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी बनता है। यही परंपराएं त्योहारों की वास्तविक खूबसूरती हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सामाजिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति की विरासत को आगे बढ़ाती हैं।
आकर्षक श्रृंगार में निकला राम रथ, हनुमान के मनमोहक स्वरूप और वानर सेना ने मोहा मन।
विजयादशमी के पावन अवसर पर स्थानीय बालाजी महाराज मंदिर से भव्य एवं आकर्षक श्रृंगार के साथ राम रथ यात्रा निकाली गई। यात्रा में हनुमानजी का मनमोहक स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा, वहीं वानर सेना की सजीव झांकी और विशालकाय रीछ के भव्य स्वरूप ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। आकर्षक साज-सज्जा और धार्मिक स्वरूपों से सुसज्जित राम रथ यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया। राम रथ यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों और स्थानों से होते हुए रावण बल्डी पहुंची। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। पूरे रास्ते ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे, जिससे वातावरण राममय हो उठा। राम रथ के दर्शन के लिए लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक आस्था, भव्य झांकियों और श्रद्धालुओं के उमंगपूर्ण सहभाग ने विजयादशमी के उत्सव को और भी आकर्षक बना दिया।
🚨पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी और आयोजन समिति के समन्वय से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ आयोजन।
विजयादशमी पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था एवं आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में पुलिस, प्रशासन और विभिन्न विभागों की अहम भूमिका रही। थाना प्रभारी आदित्य सोनी ने पुलिस टीम के साथ पूरे समय मोर्चा संभाले रखा और सुरक्षा व्यवस्था पर सतत निगरानी बनाए रखी। वहीं, तहसील प्रशासन, विद्युत विभाग और नगर परिषद की टीमों ने भी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष पवन कुमार मिश्रा सहित अन्य प्रमुख सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी के आपसी समन्वय, सतर्कता और सहयोग से विजयादशमी का भव्य आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

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