📱गणपति भक्ति में डूबा माचलपुर, हर गली में गूंज रहा ‘गणपति बप्पा मोरया’ शाम ढलते ही मंदिरों और पंडालों में उमड़ता आस्था का सैलाब, आरती में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने बनाया भक्तिमय माहौल।
माचलपुर। आकाश शर्मा संवाददाता। ढोल की थाप… शंखनाद… घंटियों की गूंज… और चारों ओर एक ही जयघोष—‘गणपति बप्पा मोरया’। गणेशोत्सव के रंग में इन दिनों पूरा माचलपुर ऐसा रंगा नजर आ रहा है, मानो नगर का हर रास्ता गणपति बप्पा के दरबार तक पहुंच रहा हो। सूर्यास्त होते ही नगर के मंदिरों और विभिन्न गणेश पंडालों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ता है। आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और गूंजते जयकारे वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देते हैं।
नगर में गणपति उत्सव महज धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, उल्लास और सामाजिक एकजुटता का जीवंत उत्सव बन गया है। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी पूरे उत्साह के साथ गणपति आराधना में सहभागी बन रहे हैं। आरती की थालियां सज रही हैं, दीप प्रज्वलित हो रहे हैं और भगवान गणेश के जयकारों से नगर की फिजाएं गूंज रही हैं।
📱बड़ा बाजार चौक बना आस्था का प्रमुख केंद्र।

नगर के बड़ा बाजार चौक स्थित वर्षों पुराने भगवान गणेश मंदिर में इन दिनों विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिल रहा है। मंदिर में प्रतिदिन भगवान गणेश का आकर्षक एवं मनोहारी श्रृंगार किया जा रहा है। पुजारी सेवक गिरिराज जोशी द्वारा किए जा रहे नित्य श्रृंगार की श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा है।

वहीं भक्त कमल अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन भगवान गणेश को अलग-अलग प्रसाद का भोग लगाया जा रहा है तथा प्रसादी का वितरण किया जा रहा है। भगवान के विविध स्वरूपों में होने वाले श्रृंगार और प्रसाद वितरण के चलते मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
📱विशाल गणेश प्रतिमा के समक्ष भजनों पर झूम रहा नगर।
बाजार चौक में स्थापित विशाल गणेश प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। यहां प्रतिदिन भजन-कीर्तन का आयोजन हो रहा है। जैसे ही भजनों की स्वर लहरियां गूंजती हैं, वैसे ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। माता-बहनें और युवा भक्ति के रंग में झूमते नजर आते हैं। कोई हाथों में आरती की थाली लिए खड़ा है तो कोई भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए भजनों पर नृत्य कर रहा है। धार्मिक आयोजन में बढ़ती भागीदारी ने बाजार चौक को देर शाम तक उत्सव स्थल में बदल दिया है।
📱हर गणेश दरबार में उमड़ रही श्रद्धा।
माचलपुर में एक नहीं, बल्कि अनेक स्थानों पर गणपति बप्पा की आराधना पूरे उत्साह के साथ की जा रही है। करोड़िया परिवार के आंगन में विराजित गणपति जी, नाना बाजार स्थित गणेश जी महाराज, गुप्तेश्वर महादेव रोड के भगवान गणपति, बुरंज वाले गणेश जी, कचहरी चौक में स्थापित भगवान गणेश और आवास कॉलोनी में विराजित गणपति जी मंडी प्रांगण में स्थित भगवान गणपति महाराज सहित अनेक स्थानों पर प्रतिदिन आरती एवं धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। आरती के समय इन स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बनती है। बच्चे भगवान गणेश के दर्शन के लिए उत्साहित हैं, युवा धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं और महिलाएं भजन-कीर्तन एवं आरती में श्रद्धाभाव से शामिल हो रही हैं।
📱प्रथम पूज्य हैं भगवान गणेश, इसलिए हर शुभ कार्य से पहले होती है आराधना।

सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान, सिद्धि और समृद्धि के प्रतीक हैं तथा भक्त उन्हें जीवन के विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजते हैं। भगवान गणेश को भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है। उनका गजमुख स्वरूप ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। बड़े कान अधिक सुनने, छोटी आंखें एकाग्रता और विशाल मस्तक ज्ञान एवं चिंतन का संदेश देता है। उनका वाहन मूषक मनुष्य को अपनी इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण रखने की प्रेरणा देता है।
📱गणपति की भक्ति में शक्ति, स्वरूप में संदेश।
भगवान गणेश की महिमा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। उनका स्वरूप जीवन को अनेक संदेश देता है—ज्ञान प्राप्त करो, विवेक से निर्णय लो, धैर्य रखो, दूसरों की सुनो और अहंकार से दूर रहो। यही कारण है कि गणपति आराधना को श्रद्धालु जीवन में शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक मानते हैं। माचलपुर में इस बार गणेशोत्सव का नजारा कुछ ऐसा है कि शाम होते ही नगर की रफ्तार मानो थम जाती है और हर कदम गणपति बप्पा के दरबार की ओर बढ़ता दिखाई देता है। मंदिरों में आरती की लौ, पंडालों में सजी गणपति प्रतिमाएं, भजनों की गूंज, ढोल की थाप और श्रद्धालुओं के जयकारे मिलकर ऐसा वातावरण निर्मित कर रहे हैं, जिसमें माचलपुर की फिजाओं में इन दिनों सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है—गणपति बप्पा। गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया!


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